शहीदों और शोहदों का न्यू इंडिया
जन्मदिन मुबारक हो भगत सिंह जी !
बहुत ही कम उम्र में दुनिया छोड़ गए थे आप. शहीद हो गए देश के लिए. लेकिन सोचती हूँ आज अगर आप ज़िंदा होते तो देश की ऐसी हालत देखकर यक़ीनन चल बसते. ऐसे में आपके बलिदान का महत्व कोई न समझता. उस से तो बेहतर ही है आप आज़ादी के लिए लड़े और अपनी जान गँवा कर शहीद कहलाए गए. ये और बात है कि सरकारी रेकर्ड में आपको आज तक शहीद का दर्जा नहीं मिला है. कैसी विडंबना है !
चाहे भगत सिंह हो या सरहद पर गोली खाने वाला बहादुर जवान - शहीदी का तमग़ा हासिल करने के लिए वह सख़्त जान लड़का कितना नादान हो जाता है कि घरबार बीवी बच्चे सब कुछ छोड़ कर मरने को चला जाता है. कड़कड़ाती ठंड में पानी-सी पतली दाल और पापड़ जैसी दो रोटियाँ खाकर भी खड़ा रहता है. और ज़रा सी शिकायत कर दे तो कहलाता है देशद्रोही. बहुत लालची है. बहुत आराम गर्द हो रहा है. इसको आचार चटनी चाहिए दाल के साथ ? अब घी माँगेगा ये ? देशद्रोही कहीं का !
अच्छा ही है भगत सिंह जी आप नहीं है, आप नहीं देख पाते ऐसे स्मार्ट इंडिया... ऐसे न्यू इंडिया को !
बहुत ही कम उम्र में दुनिया छोड़ गए थे आप. शहीद हो गए देश के लिए. लेकिन सोचती हूँ आज अगर आप ज़िंदा होते तो देश की ऐसी हालत देखकर यक़ीनन चल बसते. ऐसे में आपके बलिदान का महत्व कोई न समझता. उस से तो बेहतर ही है आप आज़ादी के लिए लड़े और अपनी जान गँवा कर शहीद कहलाए गए. ये और बात है कि सरकारी रेकर्ड में आपको आज तक शहीद का दर्जा नहीं मिला है. कैसी विडंबना है !
चाहे भगत सिंह हो या सरहद पर गोली खाने वाला बहादुर जवान - शहीदी का तमग़ा हासिल करने के लिए वह सख़्त जान लड़का कितना नादान हो जाता है कि घरबार बीवी बच्चे सब कुछ छोड़ कर मरने को चला जाता है. कड़कड़ाती ठंड में पानी-सी पतली दाल और पापड़ जैसी दो रोटियाँ खाकर भी खड़ा रहता है. और ज़रा सी शिकायत कर दे तो कहलाता है देशद्रोही. बहुत लालची है. बहुत आराम गर्द हो रहा है. इसको आचार चटनी चाहिए दाल के साथ ? अब घी माँगेगा ये ? देशद्रोही कहीं का !
अच्छा ही है भगत सिंह जी आप नहीं है, आप नहीं देख पाते ऐसे स्मार्ट इंडिया... ऐसे न्यू इंडिया को !
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